एक कदम प्रकृति की ओर

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आज एक नए अहसास का जन्म हुआ,
मन में पौध लगाने का एक भाव उत्पन्न हुआ।
बढेगी बेल अहसास है हमें,
प्रकृति पर पूरा विश्वास है हमें।
आज नही तो कल मेहनत रंग लायेगी,
बगिया जीवन की महकेगी और महकाएगी।
उम्मीद कभी न निष्फल जायेगी,
कोशिश अरमानों की आगे बढ़ती जाएगी।
कर कोशिश न डर,
घाव भूमि के भर।
बढ़ा कदम न पीछे हट,
मुश्किलें है अगर तो भी डट।
लगा एक पौध और फिर सींच,
देख प्रकृति को निहार ऑंखें न मींच।
जो लगाता है जीवन में वृक्ष पाँच,
न आएगी फिर प्राणवायु पर कोई आँच।
बगिया उत्साह की फिर लहरायेगी,
पौधे तेरी तेरे बाद भी सबका मन बहलाएगी।
चलो मिलकर हम करे ये संकल्प,
लगाए रल-मिल निज पौध,
न हो इसका कोई विकल्प।
जल – जन में ये भाव जगाना है,
बस एक पौध तो अवतरण दिवस पर लगाना है।

मनीषा गौड़
(हिंदी अध्यापिका)

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This Post Has 9 Comments

  1. shikha

    Beautifully written !
    Relevant with global warming and climatic conditions.

  2. Ms Nandini Sharma

    VERY INSPIRING POEM.

  3. satyabhama mahmia

    So nice

  4. Himanshu

    Amazing lines

  5. Himanshu

    Beautiful, written wonderfully well.

  6. Himanshu

    Beautiful, written wonderfully well

  7. Himanshu

    Awesome

  8. Manjusha yadav

    Bhut accha hai ma’am👌👌

  9. Manjusha yadav

    Bahut Accha Ma’am🤟🤟

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